डिबेट से जवाबदेही तय होती है, लेकिन जवाबदेही के नाम पर अब निशानदेही हो रही है। टारगेट किया जा रहा है। इस डिबेट का आगमन हुआ था मुद्दों पर समझ साफ करने के लिए, लेकिन जल्दी ही डिबेट जनमत की मौत का खेल बन गया। देखिए प्राइम टाइम में ये खास रिपोर्ट…

ताकि हम सुन सकें कि हम क्या बोलते हैं

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