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‘बरमूडा ट्रायंगल’ सबसे पहले इन्होंने खोजा था, हजारों मौतों के बाद अब सुलझा इसका रहस्य

आपने हॉरर फिल्मों में वो सीन जरूर देखा होगा, जब नदी या समुद्र के पास जाते ही कोई इंसान या चीज अचानक गायब हो जाती है. कभी-कभी तो फिल्मों में ऐसा सीन इतना खूबसूरती से फिल्मायांं जाता है कि ऐसा लगता ही नहीं कि ये कोई फिल्म है. अब जरा, फिल्मी दुनिया से हटकर हकीकत में ऐसा सोचिए. जब आपके आगे कोई कार जा रही हो और अचानक वो तेज गति में ऊपर की ओर उठती है और आसमान में गायब हो जाती है. वाकई, ऐसी कल्पना भी किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है. कुछ ऐसी ही रहस्यमय कहानी है बरमूडा ट्रायंगल की.

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हाल ही में बरमूडा ट्रायंगल एक बार फिर से चर्चा में है. वैज्ञानिकों की मानें, तो हजारों सालों से पहेली बने हुए इस ट्रायंगल के रहस्य पर से पर्दा उठ चुका है. सोशल मीडिया पर भी बरमूडा ट्रायंगल ट्रेंड करने लगा है. लेकिन इन सब बातों से परे कुछ लोग ऐसे भी हैंं, जिन्होंने बरमूडा ट्रायंगल से जुड़ी हुई बातें जरूर सुनी है, लेकिन बरमूडा ट्रायंगल है क्या? इसके बारे में ज्यादा नहीं पता. आइए, पहले जानते हैं बरमूडा ट्रायंगल आखिर है क्या?

इसे कहते हैं बरमूडा ट्रायंगल

बरमूडा ट्रायगल अटलांटिक सागर में 5 लाख स्क्वायर किलोमीटर का एक हिस्सा है. इसका आकार ट्राएंगल की तरह है. पिछले 100 साल में इसमें 75 एरोप्लेन और 100 से ज्यादा छोटे-बड़े जहाज समा चुके हैं. 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इसे डेविल (राक्षस) ट्रायंगल नाम से भी जाना जाता है.

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सबसे पहले कोलंबस ने देखा था

बरमूडा ट्रायंगल के बारे में सबसे पहले सूचना देने वाले क्रिस्टोफर कोलंबस ही थे. कोलंबस ही वह पहले शख्स थे, जिनका सामना बरमूडा ट्रायंगल से हुआ था. उन्होंने अपनी लेखों में इस त्रिकोण में होने वाली गतिविधियों का जिक्र करते हुए लिखा है कि जैसे ही वह बरमूडा त्रिकोण के पास पहुंचे,  उनके कम्पास (दिशा बताने वाला यंत्र) ने काम करना बंद कर दिया. इसके बाद क्रिस्टोफर कोलंबस को आसमान में एक रहस्यमयी आग का गोला दिखाई दिया, जो सीधा जाकर समुद्र में गिर गया.

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इन घटनाओं से भयानक हुआ बरमूडा ट्रायंगल

बीते 100 सालों में यहां हजारों लोगों की जान गई है. एक आंकड़े में यह तथ्य सामने आया है कि यहां हर साल औसतन 4 हवाई जहाज और 20 समुद्री जहाज रहस्यमयी तरीके से गायब होते हैं. 1945 में अमेरिका के पांच टारपीडो बमवर्षक विमानों के दस्ते ने 14 लोगों के साथ फोर्ट लोडअरडेल से इस त्रिकोणीय क्षेत्र के ऊपर से उड़ान भरी थी. यात्रा के लगभग 90 मिनट बाद रेडियो ऑपरेटरों को सिग्नल मिला कि कम्पास काम नहीं कर रहा है. उसके तुरंत बाद संपर्क टूट गया और उन विमानों में मौजूद लोग कभी वापस नहीं लौटे. उनके बचाव कार्य में गए तीन विमानों का भी कोई नामों-निशान नहीं मिला. शोधकर्ताओं का मानना है कि यहां समुद्र के इस भाग में एक शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र होने के कारण जहाजों में लगे उपकरण काम करना बंद कर देते हैं. जिस कारण जहाज रास्ता भटक जाते हैं और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं.

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ये है रहस्य का सच

बरमूडा ट्रायंगल पर रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि बरमूडा ट्रायंगल में बेहद भारी चीजों को अपनी ओर खींच लेने की ताकत बादलों की हेक्सागोनल शेप की वजह से आती है. यह बादल ‘एयर बम’ बनाते हैं. यानी हवा में बम ब्लास्ट जैसी ताकत पैदा करते हैं. इनके साथ 170 मील (करीब 273 किलोमीटर)/घंटा की रफ्तार वाली हवाएं होती हैं. ये बादल और हवाएं आपस में मिलकर जब जहाज या एरोप्लेन से टकराते हैं और उन्हें खींचकर समुद्र के तल में ले जाते हैं.

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इस वजह शक्तिशाली होती है समुद्री तरंगें

बरमूडा ट्रायंगल पर बनने वाला फोर्स समुद्र के पानी से टकराता है, जिससे सुनामी से भी ज्यादा ऊंची लहरें पैदा होती हैं. ये लहरें आपस में टकराकर और ज्यादा एनर्जी पैदा करती हैं. इस दौरान इनके आसपास मौजूद हर चीज बर्बाद  हो जाती है.

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